कार में बैठा बॉम्बर, हाथ में ट्रिगर और पास में रखी ऑनलाइन किल गाइड. जिस लाल किले को देश अपनी आन-बान-शान मानता है, उसे दहलाने के लिए आतंकी पिछले 2 सालों से चुपचाप रेकी कर रहे थे. प्लान तो लंबे गेम का था लेकिन जैसे ही श्रीनगर में रेड पड़ी और साथियों की गिरफ्तारियां शुरू हुईं, मुख्य आरोपी उमर उन नबी पैनिक मोड में आ गया. पकड़े जाने के भयानक खौफ में उसने आनन-फानन में लाल किले के बाहर खड़ी कार में बैठकर खुद आईईडी ब्लास्ट कर दिया. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की चार्जशीट में सामने आए इस खौफनाक सच ने पूरे देश के होश उड़ा दिए हैं.
10 नवंबर 2025 को लाल किले के बाहर धमाका हुआ था. इस हमले को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अपनी चार्जशीट (RC-21/2025/NIA/DLI) दाखिल कर दी है. चार्जशीट ने मामले की परतें खोलकर रख दी हैं. NIA के खुलासे के मुताबिक, लाल किले के पास हुआ यह हमला कोई आम आईईडी ब्लास्ट नहीं बल्कि एक सोची-समझी आत्मघाती साजिश थी.
कार के अंदर बैठकर खुद दबाया था बटन
NIA की चार्जशीट में साफ लिखा है कि मुख्य आरोपी उमर उन नबी (A-1) धमाके के वक्त गाड़ी के अंदर ही मौजूद था. उसने कार के भीतर बैठकर कमांड मैकेनिज्म का इस्तेमाल किया और आईईडी (IED) को खुद एक्टिवेट कर दिया. यह हमला अंसार गजवात-उल-हिंद (AGuH) मॉड्यूल से जुड़ा हुआ था. आतंकी किसी भी कीमत पर लाल किले जैसी ऐतिहासिक और संवेदनशील जगह पर बड़ा नुकसान पहुंचाना चाहते थे.
इस किताब में सिर्फ नफरत भरे भाषण ही नहीं थे बल्कि हथियारों, एक्सप्लोसिव्स, TATP के इस्तेमाल और रिमोट-कंट्रोल डेटोनेटर बनाने की पूरी ट्रेनिंग दी गई थी. इसके अलावा, पुलिस से बचने के लिए फर्जी पहचान बनाने, चोरी-छिपे मूवमेंट करने और अकेले हमला करने की स्ट्रैटेजी भी सिखाई गई थी.
‘पैनिक अटैक’ के चक्कर में जल्दी कर दिया ब्लास्ट
NIA के खुलासे के मुताबिक, आतंकी लाल किले की रेकी पिछले लगभग दो सालों से कर रहे थे. दिसंबर 2023 से ही उमर उन नबी अपने साथियों के साथ कई बार लाल किले के चक्कर काट चुका था. हालांकि हमले की तारीख पहले से 10 नवंबर तय नहीं थी. दरअसल, श्रीनगर में जब उसके साथी आतंकियों की धरपकड़ शुरू हुई तो उमर बुरी तरह घबरा गया. उसे लगा कि पुलिस उस तक कभी भी पहुंच सकती है. इसी डर और पकड़े जाने के खौफ में उसने आनन-फानन में लाल किले के पास जाकर खुद को उड़ा लिया.
लोकतंत्र के खिलाफ नफरत और शरिया का एजेंडा
अल-फलाह स्थित ठिकाने से NIA को हाथ से लिखे कई नोट्स मिले हैं. इन नोट्स में भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को खारिज करते हुए शरिया कानून लागू करने की बातें लिखी थीं. चार्जशीट के अनुसार, लाल किले को निशाना बनाने की वजह यही थी कि यह ‘भारतीय राज्य और सत्ता का सबसे बड़ा प्रतीक’ है.
